Friday, August 8, 2008
बोस्टन शेहर में सुबह की सैर --
रोजाना की तरहां ब्रहम महूर्त में जाग गयाशौच आदि से निपट कर सैर वाले कपड़े पहिन कर घुमने निकल गए उजालाअब होने लगा पक्षी दाने की तलाश में उड़ते दिखने लगे हम ने देखा एक साठवर्षीय महिला जिसका चेहरा लाल सुर्ख था एक शिकन तक नही थी सलोने चेहरे पर १ वहअपने गाब्रियल कुते को भी सैर करवा रही थी ! चलते चलते लारेंस स्ट्रीट की और बडगए सब तरफ़ हरियाली और फूलों की बहार थी जेसे चंडीगड़ या भोपाल की लिंक रोड न; वन दिखाई देती हे हर घर के आगे मखमली ग्रास कारपेट देख स्वर्ग का आभास लग रहा था मेने देखा लम्बी डोरी अपने सुंदर हाथों में थामे एक चितचोर लड़की अपने लाडले टॉमी को सैर करवा रही थी ! टॉमी ने टांग उठा करएक पोधे को अर्घ दिया और थोडी दूर जा कर शौच करने बैठ गया ! मेने यहाँ एक ख़ास बात देखि जो आपको बताना चाहता हूँ ! ग्ब्रियल कुते की मालकिन और टॉमी पालिका में एक समानता देखीदोनों के हाथो में डिस्पोजल नेपकिन और प्लास्टिक की थेलीया थी दोनों ने अपने अपने कुते के शौच को पेपर नेपकिन में उठाया और प्लास्टिक बेग में डालकर कूडेदान में डाल दिया ! नगर की सफाई इतनी नेक नीयत के साथमुझे केवल इसी देश में नजर आई ! धन्य हे ऐसे महान लोग ! ॐ शान्ति !
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